फर्मी डिराक सांख्यिकी यह सांख्यिकी फर्मीऑन या फर्मी कणों पर आरोपित की जाती है, अर्थात् वे कण जो अविभेदित हों तथा जिनकी चक्रण क्वांटन संख्या अर्द्ध पूर्णांक हो। कण एक दूसरे से अविभेदित होते हैं। प्रत्येक कोश या उपस्तर में 0 या 1 कण हो सकता है, अर्थात् g i, >> n i निकाय में कुल कणों की संख्या सदैव नियत रहती है, n = Σn i = नियत विभिन्न समूहों में स्थित सभी कणों की ऊर्जा का योग अर्थात् निकाय की कुल ऊर्जा सदैव नियत रहती है E = Σn i ε i = नियत हम n स्वतंत्र समरूप कण, जिनका चक्रण अर्द्ध पूर्णांक है, पर विचार करते हैं। इन कणों को क्वांटम समूहों या स्तरों में इस प्रकार वितरित करना है कि ऊर्जा स्तर ε 1, ε 2, ε 3, ... ε i अपभ्रष्टता g 1, g 2, g 3, ... g i कणों की संख्या n 1, n 2, n 3, ... n i हम एक बक्से पर विचार करते है। इस बक्से में g i भाग हैं, जिसमें n i कणों ...
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