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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

समुद्र की अथाह गहराई में प्रकाश की अनुपस्थिति में कैसे हो रहा है ऑक्सीजन का निर्माण

समुद्र की अथाह गहराई में प्रकाश की अनुपस्थिति में कैसे हो रहा है ऑक्सीजन का निर्माण?

पत्रिका न्यूज नेटवर्क के अनुसार वैज्ञानिकों की एक अन्तरराष्ट्रीय टीम ने समूद्र में डार्क ऑक्सीजन की खोज की है। टीम के शोध के मुताबिक प्रशांत महासागर के निचले भाग में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन पम्प कर रही है। यह हिस्सा समुद्र की इतनी गहराई में है कि वहां सूरज की रोशनी पहुंचना सम्भव नही है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया के बिना ऑक्सीजन का बनना समुचे वैज्ञानिक जगत को हैरान कर रहा है। 

नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपे शोध के अनुसार समुद्र की सतह से 4000 मीटर गहराई में पूर्ण अंधकारमय होते हुए भी ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। इसे डार्क ऑक्सीजन कहा गया है। अभी तक वैज्ञानिकों का यह मानना था कि सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति में ऑक्सीजन नही बन सकती है। वैज्ञानिकों की यह खोज प्रकाश संश्लेषण की उपस्थिति में ही ऑक्सीजन के निर्माण की धारणा के विरूद्ध है। 

एंड्रयू स्वीटमैन के अनुसार पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के लिए ऑक्सीजन आवश्यक थी। अभी तक हम यह मानते रहे हैं कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रकाश संश्लेषक जीवों से शुरू हुई, परन्तु अब इस पर पुनः विचार करने की जरूरत है कि जीवन की शुरूवात कहां से हुई। 


ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले नोड्यूल्स  


इस शोध के दौरान यह जानकारी भी हैरान करने वाली रही कि समुद्र की गहराई में ऑक्सीजन पौधे नही बना रहे हैं। एंड्रयू स्वीटमैन के अनुसार वहां ऑक्सीजन धातु के नोड्यूल्स से निकलती है, जो कोयले के ढेर के समान होते हैं। आलू के आकार के ये नोड्यूल्स पानी के अणुओं को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बांटते हैं। स्वीटमैन की इस नई खोज से ऑक्सीजन के निर्माण की एक नई बहस छिड़ सकती है। यह ध्यान रखने योग्य है कि पृथ्वी की आधी ऑक्सीजन समुद्र से ही आती है।

Source: Rajasthan Patrika

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