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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

न्यूटन का द्वितीय नियम | Newton's second law in Hindi

न्यूटन का द्वितीय नियम 

  • इस नियम के अनुसार संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल के समानुपाती होती है, तथा संवेग मे यह परिवर्तन सदैव आरोपित बल की दिशा में होता है।
  • F ∝ (d/ dt)    ⇒    F = k (d/ dt)
  • यहां F आरोपित बल है, p रेखीय संवेग है, तथा k समानुपाती नियतांक है।
  • S.I. में k = 1
  • ∴   F = d/ dt
  • ∵   p = mv
  • ∴   F = d(mv) / dt    ⇒    F = m (d/ dt)    ⇒    F = ma    (∵ a = d/ dt)
  • इस प्रकार न्यूटन का द्वितीय नियम, बल की मात्रात्मक परिभाषा प्रदान करता है।
  • यदि ax, ay तथा az क्रमशः x, y तथा z दिशा में त्वरण के घटक हों, तो
  • F = m (ai + aj + ak) = (max) i + (may) j + (maz) k
  • F = Fi + Fj + Fk
  • चूंकि न्यूटन का प्रथम तथा तृतीय नियम, द्वितीय नियम द्वारा निगमित किया जा सकता है। अतः यही नियम वास्तव में गति का नियम है, या गति का मूलभूत नियम है।
  • ∵     a = F / m
  • ∴     त्वरण ∝ 1 / द्रव्यमान
  • अतः किसी वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होगा, उस वस्तु द्वारा उत्पन्न त्वरण उतना ही कम होगा।
  • चूंकि द्रव्यमान वस्तु के जड़त्व का मापक है, अतः इस समीकरण द्वारा दिया गया द्रव्यमान जड़त्वीय द्रव्यमान कहलाता है।
  • वस्तु में उत्पन्न त्वरण केवल उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है, प्रारम्भिक तथा अन्तिम वेगों पर नहीं।

बल का मात्रक

  • बल का मात्रक = द्रव्यमान का मात्रक × त्वरण का मात्रक
                               = kg  ×  m/s2 = N (न्यूटन)
  • बल का C.G.S. मात्रक डाईन होता है।
  • 1 N = 105 dyne

विमीय सूत्र

  • बल का विमीय सूत्र = [MLT-2]

त्वरित गति

  • यदि किसी गति में केवल वस्तु के वेग का परिमाण परिवर्तित होता है, तो इस प्रकार की गति में बल या तो गति की दिशा में या गति की दिशा के विपरित दिशा में आरोपित किया जाता है।
  • यदि किसी गति में केवल वस्तु की गति की दिशा परिवर्तित होती है, तो इस प्रकार की गति में बल सदेैव वस्तु की गति के लम्बवत्‌ दिशा में आरोपित किया जाता है। वृत्तीय गति इसी प्रकार की गति का उदाहरण है।

To know more about Newton's second law of motion please click on https://youtu.be/Pht9XU6CQPo

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