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Showing posts from August, 2024

National Bird Day: Why Birds Matter to Us

National Bird Day is celebrated every year on 5 January . This day is observed to spread awareness about birds, their importance in nature, and the need to protect them. Birds are beautiful living beings and play a very important role in keeping our environment healthy. Origin of National Bird Day National Bird Day was first celebrated in the year 2002 . It was started by bird lovers and environmental groups to protect birds from dangers like deforestation, pollution, and illegal hunting. The main aim of this day is to teach people, especially students, why birds are important and how we can help save them. Why Is National Bird Day Celebrated Every Year? National Bird Day is celebrated every year because many bird species are disappearing due to human activities. Cutting trees, using plastic, pollution, and climate change are harming birds and their homes. This day reminds us that: Birds need protection Nature should be respected Everyone has a responsibil...

जीभ के रंग एवं आकार से चलेगा पता बीमारियों का

जीभ के रंग एवं आकार से चलेगा पता बीमारियों का अब जीभ के रंग एवं आकार का विश्लेषण करके मधुमेह तथा स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की भविष्यवाणी की जा सकती है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया की मिडिल टेक्निकल यूनिवर्सिटी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर एक कंम्प्यूटर एल्गोरिथम विकसित किया है। इस एल्गोरिथम की सहायता से 98 प्रतिशत यथार्थता से बीमारियों की भविष्यवाणी की जा सकती है। मिडिल टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अली अज-नाजी ने बताया कि नई इमेजिंग तकनीक से मधुमेह, यकृत, स्ट्रोक, एनीमिया, अस्थमा, कोविड एवं पेट सम्बन्धी बीमारियों का पता लगाकर इनका उपचार किया जा सकता है।  शोध के अनुसार व्यक्ति के बीमार होने पर जीभ का रंग, आकार एवं मोटाई बदल जाती है, इसीलिए जब भी कोई बीमार व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है, तो डॉक्टर उसे जीभ दिखाने को कहता है। मधुमेह रोग वाले लोगों की जीभ पीली होती है। कैंसर ग्रस्त रोगी की जीभ का रंग बैंगनी होता है। साथ ही उनकी जीभ पर मोटी चिकनी परत होती है। इसी प्रकार स्ट्रोक के रोगियों की जीभ असामान्य रूप से लाल रंग की होती है। सफेद जीभ एनीमिया को दर्शाती है। नीली या बैंगनी रंग...

टायर देखकर चलाएंगे गाड़ी तो नहीं होगा एक्सीडेंट

टायर देखकर चलाएंगे गाड़ी तो नहीं होगा एक्सीडेंट देश में कारों और स्पोर्ट्स गाड़ियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन गाड़ियों के टायर के बारे में अधिक जानकारी नहीं होने की वजह से कई बार सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। सभी टायर पर स्पीड रेटिंग लिखी होती है, उसी के अनुसार सड़क पर गाड़ी दौड़ाई जा सकती है।  Information given on tire अधिकतर वाहन चालक को इसके बारे में जानकारी नही होने पर टायर गर्म होने, टायर का प्रेशर बढ़ने से टायर के फटने की आशंका रहती है। देश में यात्री गाड़ियों पर टायर रेटिंग P अंकित रहती है, अर्थात् बस को 150 kmph से अधिक नहीं भगाया जा सकता है। वहीं सामान्य सिडान कारों कारों पर H रेटिंग के टायर आते हैं, जिनकी अधिकतम गति सीमा 210 kmph तक जा सकती है। लग्जरी कारों में रेटिंग Y तक होती है, जो 300 kmph तक भगाई जा सकती हैं।  स्पीड रेटिंग अधिकतम गति (kmph) L 120 M 130 N 140 P 150 Q 160 R 170 H 210 ...

भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई की छात्राओं ने इसरो प्रदर्शनी का किया अवलोकन

भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई की छात्राओं ने इसरो प्रदर्शनी का किया अवलोकन उदयपुर 14 अगस्त, 2024। भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई के विज्ञान संकाय की छात्राओं ने अरावली तकनीकी संस्थान, उदयपुर में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) द्वारा आयोजित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रदर्शनी का भौतिक विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विमल सारस्वत के नेतृत्व में अवलोकन किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान छात्राओं को इसरो से आए वैज्ञानिक डॉ. एस. पी. व्यास ने अंतरिक्ष संबंधित विभिन्न गतिविधियों के साथ सेटेलाइट (उपग्रह) प्रक्षेपण की कार्यप्रणाली, उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजे जानेवाले रॉकेट, इस प्रक्रिया में लगने वाली लागत, मौसम की सटीक जानकारी के लिए उपग्रह को किस कक्षा में स्थापित किया जाता है, आदि के बारे में विस्तृत जानकरी दी।  इस अवसर पर इसरो की यात्रा को फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से दिखाया गया, जिसमें मंगलयान, चन्द्रयान तथा आदित्य मिशन की जानकारी भी प्रदान की गई। छात्राओं ने इसरो द्वारा भविष्य के मिशन, जिसमें गगनयान भी शामिल है, के बारे में वैज्ञानिकों से बात की तथा उनके द्व...

भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई की छात्राओं ने किया सौर वैधशाला का भ्रमण

भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई की छात्राओं ने किया सौर वैधशाला का भ्रमण उदयपुर 13 अगस्त: भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय कन्या इकाई की विज्ञान वर्ग की छात्राओं ने भौतिकी विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. विमल सारस्वत के नेतृत्व में उदयपुर सौर वैधशाला का भ्रमण किया। सौर वैधशाला द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष में इस वर्ष पूरा सप्ताह मनाया जा रहा है, जिसका शुभारम्भ सोमवार 12 अगस्त को किया गया। इस भ्रमण में विद्यार्थियों ने सौर वैधशाला में सूर्य पर किए जाने वाले अध्ययन के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान विषय विशेषज्ञ डाॅ. अंकाला राजा बयन्ना ने उदयपुर सौर वैधशाला को पानी के मध्य बनाए जाने की उपयोगिता के बारे में बताया। प्रो. शिबू मैथ्यू ने टेलिस्कोप की कार्य प्रणाली तथा इससे किस प्रकार डेटा प्राप्त किया जाता है, यह किस प्रकार सदैव सूर्य की ओर केन्द्रित रहता है, उसकी सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की। डाॅ. रोशन तथा डाॅ. अभिषेक ने सूर्य पर प्राप्त होने वाले धब्बों (sunspot) का क्या प्रभाव पड़ता है, सोलर चक्र (solar cycle) क्या है, कितने समय बाद इसकी पुनरावृत्ति होती है, उसके ब...

समुद्र की अथाह गहराई में प्रकाश की अनुपस्थिति में कैसे हो रहा है ऑक्सीजन का निर्माण

समुद्र की अथाह गहराई में प्रकाश की अनुपस्थिति में कैसे हो रहा है ऑक्सीजन का निर्माण? पत्रिका न्यूज नेटवर्क के अनुसार वैज्ञानिकों की एक अन्तरराष्ट्रीय टीम ने समूद्र में डार्क ऑक्सीजन की खोज की है। टीम के शोध के मुताबिक प्रशांत महासागर के निचले भाग में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन पम्प कर रही है। यह हिस्सा समुद्र की इतनी गहराई में है कि वहां सूरज की रोशनी पहुंचना सम्भव नही है। प्रकाश संश्लेषण क्रिया के बिना ऑक्सीजन का बनना समुचे वैज्ञानिक जगत को हैरान कर रहा है।  नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपे शोध के अनुसार समुद्र की सतह से 4000 मीटर गहराई में पूर्ण अंधकारमय होते हुए भी ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। इसे डार्क ऑक्सीजन कहा गया है। अभी तक वैज्ञानिकों का यह मानना था कि सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति में ऑक्सीजन नही बन सकती है। वैज्ञानिकों की यह खोज प्रकाश संश्लेषण की उपस्थिति में ही ऑक्सीजन के निर्माण की धारणा के विरूद्ध है।  एंड्रयू स्वीटमैन के अनुसार पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के लिए ऑक्सीजन आवश्यक थी। अभी तक हम यह मानते रहे हैं कि पृथ्वी पर ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रकाश संश्लेषक जीवों से शुरू हु...

प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई

 प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई दिनांक 2 अगस्त, 2024 को विज्ञान भारती - उदयपुर इकाई  (चित्तौड़ प्रांत) एवं पीएम श्री राजकीय फ़तेह सीनियर सेकेंडरी स्कूल, उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई गयी। कार्यकम की अध्यक्ष्ता डॉ. अमित गुप्ता एवं डॉ. चेतन पानेरी द्वारा की गयी। इस उपलक्ष में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जीवनी पर विभिन्न वक्ताओं द्वारा विचार व्यक्त किये गए। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. लोकेश अग्रवाल, सहायक आचार्य, मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय द्वारा बताया गया की आचार्य रे का जीवन एक शिक्षक, एक वैज्ञानिक एवं स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारत को समर्पित रहा है। आचार्य रे द्वारा "द हिन्दू केमिस्ट्री" जैसी पुस्तक लिखी गयी जो भारत की प्राचीन उत्कृष्ट विज्ञान शोध को दर्शाती है। डॉ. कमल सिंह राठौड़, बी एन विश्वविद्यालय द्वारा बताया गया कि आचार्य रे द्वारा किस तरह से विपरीत परिस्तिथियों के अंदर बंगाल फार्मास्यूटिकल की स्थापना की गयी और आज भारत देश फार्म क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है। डॉ. मोहित गोखरू द्वारा विद्यार्थिय...