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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई

 प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई

दिनांक 2 अगस्त, 2024 को विज्ञान भारती - उदयपुर इकाई  (चित्तौड़ प्रांत) एवं पीएम श्री राजकीय फ़तेह सीनियर सेकेंडरी स्कूल, उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जयंती मनाई गयी। कार्यकम की अध्यक्ष्ता डॉ. अमित गुप्ता एवं डॉ. चेतन पानेरी द्वारा की गयी। इस उपलक्ष में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जीवनी पर विभिन्न वक्ताओं द्वारा विचार व्यक्त किये गए। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. लोकेश अग्रवाल, सहायक आचार्य, मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय द्वारा बताया गया की आचार्य रे का जीवन एक शिक्षक, एक वैज्ञानिक एवं स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारत को समर्पित रहा है। आचार्य रे द्वारा "द हिन्दू केमिस्ट्री" जैसी पुस्तक लिखी गयी जो भारत की प्राचीन उत्कृष्ट विज्ञान शोध को दर्शाती है। डॉ. कमल सिंह राठौड़, बी एन विश्वविद्यालय द्वारा बताया गया कि आचार्य रे द्वारा किस तरह से विपरीत परिस्तिथियों के अंदर बंगाल फार्मास्यूटिकल की स्थापना की गयी और आज भारत देश फार्म क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है। डॉ. मोहित गोखरू द्वारा विद्यार्थियों को मोबाइल कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को सरल एवं सहज भाषा में समझाया गया। डॉ. हरीश द्वारा विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में कैरियर की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गयी।  कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलदीप शर्मा  तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अचर्ना राव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ जीतेन्द्र सिंह राठौड़, मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर एवं डॉ. मोहन सिंह राठौड़,  बी एन विश्वविद्यालय, उदयपुर भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षकों एवं लगभग 200 विद्यार्थियों ने भाग लिया।








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गैसों का अणुगति सिद्धान्त तथा आदर्श गैस का दाब गैसों के गतिज सिद्धान्त की अभिधारणाएं एक गैस अत्यन्त छोटे, अदृश्य एवं पूर्णतः प्रत्यास्थ कणों से मिलकर बनी होती है, जो अणु   कहलाते हैं। एक शुद्ध गैस के सभी अणु समदृश होते हैं तथा ये सभी सम्भव दिशाओं में सभी सम्भव वेग से सतत्‌ रूप से गति करते रहते हैं। गैस जिस पात्र में भरी जाती है, वह उस पात्र की दीवारों पर दाब लगाती है। गैस के अणु किन्हीं दो क्रमागत टक्करों के मध्य सीधी रेखा में गति करते हैं। गैस के अणुओं का आकार किन्हीं दो क्रमागत टक्करों के मध्य तय की गई दूरी की तुलना में अनन्त सूक्ष्म होता है। ये टक्करें तात्क्षणिक होती हैं तथा टक्करों में गतिज ऊर्जा की कोई हानि नहीं होती है। अणु एक दूसरे पर कोई बल नहीं लगाते हैं। वे एक दूसरे पर बल केवल टकराने के दौरान लगाते हैं। इनकी सम्पूर्ण आणविक ऊर्जा, गतिज ऊर्जा होती है। गैस के अणुओं का कुल आयतन, उस पात्र के आयतन, जिसमें यह भरी है कि तुलना में नगण्य होता है। गैस में अन्तर-आणविक दूरी बहुत अधिक होती है, जिससे कि गैस के अणु उसके लिए उपलब्ध सम्पूर्ण स्थान में मुक...

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