Skip to main content

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

Half wave rectifier in Hindi | अर्द्ध तरंग दिष्टकारी

अर्द्ध तरंग दिष्टकारी

दिष्टकारी

  • वह युक्ति जो प्रत्यावर्ती वोल्टता (या धारा) को दिष्ट वोल्टता (या धारा) में परिवर्तित करने के लिए प्रयुक्त होती है, या वह युक्ति जो दिष्टकरण की प्रक्रिया के लिए प्रयुक्त होती है, दिष्टकारी कहलाती है।
  • वह प्रक्रिया जिससे प्रत्यावर्ती वोल्टता (या धारा) को दिष्ट वोल्टता (या धारा) में परिवर्तित किया जाता है, दिष्टकरण कहलाती है।

दिष्टकारी का सिद्धान्त

  • डायोड अग्र बायस में अल्प प्रतिरोध प्रदान करता है, जबकि पश्च बायस में इसका प्रतिरोध अधिक होता है।
  • इसलिए डायोड जब उत्क्रम बायस में होता है, तो परिपथ में से एक अत्यन्त अल्प मान की धारा या प्रायोगिक रूप में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। इस सिद्धान्त का प्रयोग दिष्टकारी की कार्य प्रणाली में किया जाता है।

अर्द्ध तरंग दिष्टकारी (HWR)

  • वह दिष्टकारी जो केवल आधी निवेशी प्रत्यावर्ती तरंग को निर्गत दिष्ट तरंग में परिवर्तित करता है तथा शेष आधी तरंग अनउपयोगी होती है, अर्द्ध तरंग दिष्टकारी कहलाता है।

  • इस दिष्टकारी में ट्र्र्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली पर प्रत्यावर्ती वोल्टता E = E0 sin ωt आरोपित की जाती है।
  • निर्गत वोल्टता सदैव धनात्मक होती है, परन्तु यह समय के साथ नियत नहीं रहती है।
  • निर्गत वोल्टता स्पन्दमय दिष्ट वोल्टता होती है।
  • यदि Rf = डायोड का अग्र गत्यात्मक प्रतिरोध, Rs = ट्र्रांसफॉर्मर की द्वितीयक कुण्डली का प्रतिरोध, तथा RL = भार प्रतिरोध हो, तो
  • RL में से प्रवाहित धारा

स्पन्दमय धारा या वोल्टता का औसत मान


RL के सिरों पर वोल्टता का औसत मान


स्पन्दमय धारा या वोल्टता का वर्ग माध्य मूल मान

  • निवेशी के पूर्ण चक्र के लिए धारा के वर्ग के माध्य के वर्गमूल को धारा का वर्ग माध्य मूल (rms) मान कहते हैं।


निर्गत वोल्टता का वर्ग माध्य मूल मान (rms) मान


परिपथ को प्रवाहित शक्ति

  • निवेशी प्रत्यावर्ती शक्ति = Rs के अनुदिश शक्ति + डायोड प्रतिरोध Rf के अनुदिश शक्ति + RLके अनुदिश शक्ति

भार में प्रवाहित औसत शक्ति

  • भार RL में प्रवाहित निर्गत दिष्ट शक्ति

दिष्टकारी की दक्षता

  • निर्गत दिष्ट शक्ति तथा निवेशी प्रत्यावर्ती शक्ति के अनुपात को दिष्टकारी की दक्षता कहते हैं।
  • η = (निर्गत दिष्ट शक्ति / निवेश प्रत्यावर्ती शक्ति) × 100 %

  • भार प्रतिरोध RL के मान को बढ़ाकर, दिष्टकारी की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है।
  • जब RL >> R हो, तो ηmax = 40.6 %
  • जब RL = R हो, तो η = 20.3 %

उर्मिका गुणांक (r)

  • दिष्टकारी से प्राप्त निर्गत वोल्टता या धारा एकदिशीय होती है, परन्तु इसका मान समय के साथ नियत नहीं रहता है।
  • निर्गत धारा या वोल्टता में विद्यमान स्पन्द, उर्मिका कहलाते हैं।
  • उर्मिका गुणांक, दिष्टकारी की निर्गत वोल्टता या धारा के नियमन का मापन प्रदान करता है।
  • r = निर्गत प्रत्यावर्ती धारा का प्रभावी मान / निर्गत धारा का औसत या दिष्ट घटक = Iac / Idc
  • प्रत्यावर्ती परिपथ सिद्धान्त से

  • अतः HWR प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में परिवर्तित करने की एक खराब युक्ति है।

वोल्टता नियमन (VR)

  • भार प्रतिरोध के मान को परिवर्तित करने पर दिष्टकारी द्वारा नियत वोल्टता बनाए रखने की सामर्थ्य, वोल्टता नियमन कहलाती है।
  • VR = [(VNL - VFL) / VFL ] × 100%
  • VNL = भार प्रतिरोध की अनुपस्थिति (जब RL = ∞) में निर्गत वोल्टता
  • VFL = भार प्रतिरोध की उपस्थिति में निर्गत वोल्टता
  • आदर्श शक्ति प्रदाय के लिए, VR = 0
  • अर्थात् आदर्श शक्ति प्रदाय में निर्गत वोल्टता भार पर निर्भर नहीं करती है।


  • जैसे-जैसे Idc का मान बढ़ता है, Edc का मान रेखीय रूप से घटता है।

प्रतीप शिखर वोल्टता (PIV)

  • जब परिपथ में कोई भी धारा प्रवाहित नहीं हो, उस समय डायोड के सिरों पर वोल्टता का अधिकतम मान प्रतीप शिखर वोल्टता कहलाता है।
  • यह डायोड के अचालन की अवस्था में उस पर वोल्टता का अधिकतम मान है।
  • अर्द्ध तरंग दिष्टकारी के लिए, PIV = - E0

निर्गत वोल्टता या धारा का आवृत्ति घटक

  • फोरियर विश्लेषण से निर्गत धारा

  • प्रथम पद I/ π धारा का दिष्ट या औसत मान है।
  • द्वितीय पद की आवृत्ति निवेशी प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति के बराबर तथा इसका शिखर मान I0 / 2 होता है।
  • अन्य पद संनादी दर्शाते हैं।
To know more about half wave rectifier please visit on https://youtu.be/ZOGVLxLFWxU


Comments

Popular posts from this blog

Calculus in Hindi | कलन | Mathematics | BSc

कलन (Calculus) अवकलन, समाकलन तथा अवकल समीकरण (Differential Calculus, Integral Calculus and Differential Equation) लेखक: डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. अनिल कुमार मेनारिया, डॉ. चन्द्रपाल सिंह चौहान  ISBN : 978-81-7906-933-2  Price: Rs. 295.00 प्रकाशक: हिमांशु पब्लिकेशन्स, हिरण मगरी उदयपुर; हिमांशु पब्लिकेशन् प्रकाश हाउस, अंसारी रोड, नई दिल्ली E-mail :  info@sacademy.co.in Phone: +91 9664392614 To buy this book click on Calculus in Hindi by Saraswat This book includes the following topics  पदिक समीकरण एवं चाप की लम्बाई के अवकलज (Pedal Equations and Derivative of the Length of an Arc) ध्रुवीय निर्देशांक (Polar co-ordinates) कार्तीय एवं ध्रुवीय निर्देशांकों में सम्बन्ध (Relation between cartesian and polar co-ordinates) त्रिज्य सदिश एवं स्पर्श रेखा के मध्य कोण (Angle between radius vector and tangent) दो ध्रुवीय वक्रों का प्रतिच्छेन कोण (Angle of intersection of two polar curves) ध्रुवीय स्पर्शी, अधःस्पर्शी, लम्ब एवं अधोलम्ब तथा उनकी लम्बाई...

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

Real Analysis in Hindi | वास्तविक विश्लेषण | Mathematics | BSc

वास्तविक विश्लेषण (Real Analysis) वास्तविक विश्लेषण तथा अभिसरण सिद्धान्त (Real Analysis and Theory of Convergence) लेखक: डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. अनिल कुमार मेनारिया, डॉ. गजेन्द्रपाल सिंह राठौड़ ISBN : 978-81-7906-935-6 Price: Rs. 250.00 प्रकाशक: हिमांशु पब्लिकेशन्स, हिरण मगरी उदयपुर; हिमांशु पब्लिकेशन् प्रकाश हाउस, अंसारी रोड, नई दिल्ली E-mail :  info@sacademy.co.in Phone:  +91 9664392614 To buy this book click on the link Real Analysis in Hindi by Saraswat This book includes the following topics  वास्तविक संख्या निकाय (Real Number System) परिचय (Introduction) क्षेत्र अभिगृहीत (Field axiom) अद्वितीयता गुणधर्म (Uniqueness property) योग तथा गुणन के निरसन नियम (Cancellation law of addition and multiplication) क्रम अभिगृहित तथा क्रमित क्षेत्र (Order axiom and ordered field) धनात्मक वर्ग (Positive class) परिबद्धता (Boundedness) उपरि परिबद्ध (Upper bound) उच्चक (Supremum) निम्न परिबद्ध (Lower bound) निम्नक...