Skip to main content

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

X-किरण स्पेक्ट्रम | X-ray spectrum in Hindi | Atomic and Molecular physics

X-किरण स्पेक्ट्रम

X-किरण

  • X-किरण की खोज जर्मन भौतिक वैज्ञानिक वेलमन कोन्राड रोन्जन ने 1895 में कैथोड़ किरणों के गुणधर्मों के अध्ययन के दौरान की।
  • ये किरणें वास्तव में अल्प तरंगदैर्ध्यों की विद्युतचुम्बकीय तरंगें हैं जिनकी परास 10 Å से 0.5 Å तक होती हैं।
  • उच्च तरंगदैर्ध्य वाली X-किरणें, मृदु X-किरणें तथा निम्न तरंगदैर्ध्य वाली X-किरणें, कठोर X-किरणें कहलाती हैं।

X-किरणों के गुणधर्म

  • चूंकि X-किरणें विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा विचलित नहीं होती हैं, इसलिए इनमें कोई आवेशित कण नहीं होता है।
  • X-किरणें अल्प तरंगदैर्ध्य की विद्युतचुम्बकीय विकिरण होती है।
  • X-किरणें प्रकाश की भांति फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं, परन्तु इनका प्रभाव प्रकाश की तुलना में अधिक तीव्र होता है।
  • X-किरणें प्रकाश के वेग से सीधी रेखा में गति करती हैं।
  • ये किरणें कई धातुओं पर प्रतिदीप्ति उत्पन्न करती हैं।
  • X-किरणें जिस गैस में से गुजरती हैं, उसे आयनित कर देती हैं।
  • X-किरणों की भेदन क्षमता अधिक होती है तथा ये किसी भी ठोस में से गुजर सकती हैं।
  • ये प्रकाश विद्युत प्रभाव भी दर्शाती हैं।
  • X-किरणें प्रकाश की भांति व्यतिकरण, विवर्तन तथा ध्रुवण भी दर्शाती हैं।

X-किरण स्पेक्ट्रम

  • X-किरणों की तरंगदैर्ध्य ब्रेग नियम द्वारा ज्ञात की जा सकती है।
  • यदि हम किसी स्रोत से प्राप्त ग्.किरण की तरंगदैर्ध्य तथा उसकी तीव्रता के मध्य ग्राफ खीचे तो वह ग्राफ नीचे दर्शा गए चित्रानुसार होगा।
  • ग्राफ में Rh (रोडियम) को लक्ष्य लेकर विभिन्न विभवान्तर पर तीन तरंगें दर्शाई
  • स्पेक्ट्रम से स्पष्ट है कि प्रत्येक अवस्था में स्पेक्ट्रम सतत्‌ है तथा एक विशेष तरंगदैर्ध्य पर यह प्राप्त होता है।
  • यदि आरोपित विभवान्तर 23 kV से कम हो, तो केवल सतत्‌ उत्सर्जन स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
  • परन्तु उच्च विभवान्तर पर सतत्‌ स्पेक्ट्रम पर रेखिल स्पेक्ट्रम भी अध्यारोपित होता है।
  • एक रेखिल स्पेक्ट्रम लक्ष्य नाभिक की जानकारी प्रदान करता है।
  • इस प्रकार ग्.किरण नली से प्राप्त स्पेक्ट्रम के दो भाग होते हैं :

सतत्‌ स्पेक्ट्रम

  • इस स्पेक्ट्रम में दृश्य स्पेक्ट्रम की भांति एक विशेष न्यूनतम तरंगदैर्ध्य से लेकर उच्च तरंगदैर्ध्य के सभी मान होते हैं। इसलिए यह श्वेत स्पेक्ट्रम भी कहलाता है।

अभिलाक्षणिक या रेखिल स्पेक्ट्रम

  • इसमें एक विशेष तरंगदैर्ध्य का स्पेक्ट्रम, सतत्‌ स्पेक्ट्रम पर अध्यारोपित होता है।
  • इस स्पेक्ट्रम की स्पेक्ट्रमी रेखाएं साधारणतया छोटे समूहों में होती है।
  • ये रेखाएं लक्ष्य नाभिक के अभिलाक्षणिक को दर्शाती हैं।

सतत्‌ X-किरण स्पेक्ट्रम

  • सतत्‌ X-किरण स्पेक्ट्रम की खोज डूना तथा हन्ट ने की।
  • यदि टंगस्टन को लक्ष्य नाभिक लेकर तथा X- किरण नली पर विभिन्न तरंगदैर्ध्यों के साथ उत्पन्न X-किरणों की तीव्रताओं के मध्य वक्र खीचे तो वह चित्रानुसार प्राप्त होगा।
  • यह वक्र सतत्‌ X-किरण स्पेक्ट्रम प्रदान करता है।
  • प्रत्येक विभवान्तर के लिए तीव्रता—तरंगदैर्ध्य (I-λ) वक्र एक विशेष तरंदैर्ध्य पर प्रारम्भ होता है, अधिकतम मान की ओर तेजी से बढ़ता है, तत्पश्चात्‌ धीरे—धीरे घटता है।
  • तरंगदैर्ध्य का वह मान जिस पर तीव्रता अधिकतम होती है, त्वरक वोल्टता (Va) पर निर्भर करती है। त्वरक वोल्टता का मान जितना अधिक होगा, तीव्रता उतनी ही अधिक होगी।
  • जैसे—जैसे Va बढ़ता है, अधिकतम तीव्रता या शीर्ष तीव्रता कम तरंगदैर्ध्य की ओर विस्थापित होती है। इस प्रकार X-किरण की भेदन क्षमता, वोल्टता के साथ बढ़ती है।
  • प्रत्येक एनोड़ वोल्टता के लिए एक न्यूनतम तरंगदैर्ध्य (λmin) होती है, जिससे नीचे विकिरण का उत्सर्जन नहीं होता है। इसका मान लक्ष्य नाभिक पर निर्भर करता है तथा इस क्रान्तिक मान से ऊपर विकिरण की तीव्रता बढ़ती है।
  • X-किरण नली पर विभिन्न विभवान्तर आरोपित करके प्रत्येक तरंगदैर्ध्य के लिए हम सतत्‌ स्पेक्ट्रम प्राप्त कर सकते हैं।
  • X-किरण की कुल शक्ति (P) प्रायोगिक तरंग के क्षेत्रफल पर निर्भर करती है।
  • कुल शक्ति आरोपित वोल्टता के वर्ग के समानुपाती होती है।
  • P ∝ V2
  • कुल शक्ति परमाणु क्रमांक (Z) के समानुपाती होती है।
  • P ∝ Z
  • ∴  P ∝ ZV2   ⇒   P = kZV2
  • यहां k समानुपाती नियतांक है।
  • जब X-किरण नली के अनुदिश वोल्टता बढ़ाई जाती है, तो λmin कम मान की ओर विस्थापित होता है।
  • λmin ∝ 1/V
  • 𝛎max ∝ V
  • 𝛎max = kV

सतत्‌ X-किरण स्पेक्ट्रम का उद्‌गम

डूना तथा हन्ट का नियम

  • यदि एक उच्च ऊर्जा का इलेक्ट्रॉन पुंज किसी लक्ष्य नाभिक पर आपतित होता है, तो वह नाभिक के भीतर प्रवेश कर जाता है तथा अपने वास्तविक पथ से विचलित हो जाता है।

  • यदि u1 तथा u2 इलेक्ट्रॉन के क्रमशः प्रारम्भिक तथा अन्तिम वेग हों, तो
  • X-किरण फोटॉन की ऊर्जा, h𝛎 = ½ mu12 - ½ mu22
  • यदि इलेक्ट्रॉन लक्ष्य के भीतर जाकर रूक जाता है, अर्थात्‌ u2 = 0 हो, तो 𝛎 = 𝛎max
  • h𝛎 = mu12
  • eV = h𝛎max
  • eV = ch / λmin                              (∵ c  = 𝛎λ)
  • λmin = ch / eV
  • यही डूना तथा हन्ट का नियम है।
  • λmin = (12400 / V) Å
  • अधिकतर इलेक्ट्रॉन जो X-किरण फोटॉन उत्पन्न करते हैं, इस प्रक्रिया में अपनी ऊर्जा का केवल एक भाग प्रदान करते हैं।
  • इसलिए अधिकतर X-विकिरण λmin की तुलना में अधिक तरंगदैर्ध्य की होती हैं।
  • इस प्रकार सतत्‌ स्पेक्ट्रम प्रकाश विद्युत प्रभाव के उत्क्रम का परिणामी है।
To know about this topic in more detail please visit on https://youtu.be/XyhdWwToNvA

Comments

Popular posts from this blog

Algebra in Hindi | बीजगणित | Mathematics | BSc

बीजगणित (Algebra) मैट्रिक्स, समीकरण सिद्धान्त एवं समूह सिद्धान्त (Matrices, Theory of Equation and Group Theory) लेखक: डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. गजेन्द्रपाल सिंह राठौड़  ISBN : 978-81-7906-931-8 Price: Rs. 250  प्रकाशक: हिमांशु पब्लिकेशन्स, हिरण मगरी उदयपुर; हिमांशु पब्लिकेशन् प्रकाश हाउस, अंसारी रोड, नई दिल्ली E-mail : info@sacademy.co.in Phone: +91 9664392614 To buy this book click on Algebra in Hindi by Saraswat This book includes the following topics  मैट्रिक्स तथा इसकी जाति (Matrix and its Rank) परिचय (Introduction) मैट्रिक्स के प्रकार (Types of matrices) मैट्रिक्स की संक्रियाएं या मैट्रिक्स बीजगणित (Operation on matrices or matrix algebra) मैट्रिक्स योग के गुणधर्म (Properties of matrix addition) मैट्रिक्स अदिश गुणन के गुणधर्म (Properties of scalar multiplication of matrix) मैट्रिक्स की ट्रेस (Trace of a matrix) मैट्रिक्सों का गुणा (Multiplication of matrices) मैट्रिक्स गुणन के गुणधर्म (Properties of matrix multiplication) परिवर्त मैट्र...

सांवरिया सेठ के भंडारे से निकले सवा ग्यारह करोड़ रूपए

सांवरिया सेठ के भंडारे से निकले सवा ग्यारह करोड़ रूपए चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रख्यात कृष्णधाम श्रीसांवरिया स्थित सांवरा सेठ मंदिर के भंडारे से सवा ग्यारह करोड़ रूपए, 318 ग्राम सोना और लगभग 36 किलो चांदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई। मंगलवार 13 फरवरी 2024 को मंदिर भंडारे की तीसरे दौर की गणना की गई, जिसमें 66 लाख 53 हजार 676 रूपए नगद प्राप्त हुई। ऑनलाईन, मनीऑर्डर एवं भेट कक्ष में 2 करोड़ 34 लाख 80 हजार 325 रूपए प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल 11 करोड़ 27 लाख 10 हजार एक रूपए प्राप्त हुई।  To follow our blog  click here For similar post  click here Our other websites For Education For Placements   For Bhakti   For Recipes   Our Application Our YouTube channels Sacademy Atharavpur Keywords: सांवरिया सेठ स्टेटस,सांवरिया सेठ दे दे,न्यू सांवरिया जी भजन,गोकुल शर्मा सांवरिया भजन,सांवरिया सेठ,सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास,सांवरिया सेठ भजन,सुण ले सेठां वाला सेठ सांवरिया,सेठ तो सांवरिया सेठ,सांवरिया सेठ मंडफिया,मंडफिया सांवरिया सेठ,सांवरिया सेठ के दर्शन,सांवरिया सेठ न्...

Differential equations in Hindi | अवकल समीकरण | Mathematics | BSc

अवकल समीकरण (Differential equations) साधारण अवकल समीकरण तथा आंशिक अवकल समीकरण (Ordinary Differential Equation and Partial Differential Equation) लेखक: डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. अनिल कुमार मेनारिया, डॉ. गजेन्द्रपाल सिंह राठौड़ ISBN : 978-81-7906-969-1 Price: Rs. 385.00 प्रकाशक: हिमांशु पब्लिकेशन्स, हिरण मगरी उदयपुर; हिमांशु पब्लिकेशन् प्रकाश हाउस, अंसारी रोड, नई दिल्ली E-mail :  info@sacademy.co.in Phone:  +91 9664392614 To buy this book click on the link Differential Equations by Saraswat This book includes the following topics  यथार्थ एवं विशिष्ट रूप वाली अवकल समीकरण (Exact Differential Equations and Equations of Special Forms) परिचय (Introduction) nवीं कोटि के यथार्थ रैखिक अवकल समीकरण (Exact linear differential equation of nth order) nवीं कोटि के रैखिक अवकल समीकरण की यथार्थता का प्रतिबन्ध (Condition of exactness of a linear differential equation of order n) समाकलन गुणांक अरैखिक अवकल समीकरण की यथार्थता (Exactness of ...