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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

नशा देने वाले भांग के पौधों से बन रहे कपड़े

नशा देने वाले भांग के पौधों से बन रहे कपड़े

भांग का उपयोग प्रायः नशे में किया जाता है, लेकिन यह आश्चर्य की बात है कि भांग के पौधे से कपड़े भी बनाए जा रहे हैं। जोधपुर के दो युवाओं अंकित नागौरी तथा आकाश सेन ने स्टार्टअप के तहत यह काम शुरू किया है। इनके द्वारा भांग के पौधों से तैयार कपड़ों का चार देशों में निर्यात हो रहा है। राजस्थान में इस प्रकार का नवाचार करने वाले यही दो युवा हैं। इनका अगला लक्ष्य राजस्थान सरकार के साथ जुड़कर इस प्रोजेक्ट को नया आयाम देना है। दोनों युवाओं ने 2021 में ईको अर्थ नामक स्टार्टअप को धरातल पर उतारा। अंकित ने बताया कि हमारा लक्ष्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि प्रारम्भ में लोगों को समझाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था, परन्तु अब भांग से निर्मित कपड़ों की मांग काफी बढ़ गई है। 

भांग के पौधों से बने कपड़े से पेंट-शर्ट के अलावा, जूते, कम्बल, बैग, बेडशीट, टोपी, मौजे और टॉवल भी बनाए जा सकते हैं। साथ ही कंसट्रक्शन मेटेरियल भी बनाया जा सकता है, जिसमें हेम्पक्रीट, प्लास्टर पाउडर मुख्य है। साथ ही भांग के बीज, तेल, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ भी बनाए जाते हैं, जिन्हें सरकार ने वैद्यता प्रदान की हुई है। भांग के पौधों से पेपर, बायो फ्यूल, कॉस्मिटिक्स आइटम भी बनाए जाते है। 

कारण जिसकी वजह से अधिक उपयोगी ही भांग से निर्मित कपड़े 

भांग की तुलना में कॉटन को दुगुनी जगह की जरूरत होती है। 1 किलो कॉटन उत्पादन के लिए 9 लीटर से अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जबकि भांग 2 लीटर पानी में ही उग जाती है। भांग का फाइबर कॉटन की अपेक्षा 4 गुना अधिक ड्यूरेबल है। कॉटन की तुलना में भांग अधिक तीव्रता से अपघटित हो जाता है।

सोजन्यः राजस्थान पत्रिका न्यूज

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