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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता विषय पर विशेषज्ञों का मंथन

खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता  विषय पर विशेषज्ञों का मंथन पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरन्तर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मूलभूत शर्त है। हमारी न्यू जनरेशन को स्पीड और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके। उक्त विचार मुख्य अतिथि श्री एमपी सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली ने व्यक्त किए श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भूविज्ञान विभाग द्वारा "खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन पर बोल रहे थे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कान्फ्रेंस का भव्य समापन सम्मानित अतिथि प्रो विनोद अग्रवाल सदस्य, भारत सरकार नई दिल्ली स्थित MOEFCC की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, (सि एण्ड टीपी) अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण स्थिरता सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न प्रावधानों एवं कानूनों के तहत कार्य कर रहा है ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन न...

Mean kinetic energy of translation


  • According to kinetic interpretation of temperature the average kinetic energy of translation of molecule of any gas is directly proportional to the temperature and its value for perfect gas is 3/2 kT. In this lecture we have explained about the Mean KE of translation of a gas molecule, Brownian motion, relation between gamma and constitution of gas molecule, degree of freedom, and the law of equipartition of energy in detail. Since the lecture Mean KE of translation of a gas molecule is explained here in both Hindi and English language, so it is better to understand the student of Hindi and English mediums. This is bilingual lecture. This topic is related to Thermodynamics or thermal physics.

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बोस आइन्सटीन सांख्यिकी यह सांख्यिकी बोसाॅन या बोस कणों पर आरोपित की जा सकती है, अर्थात् वे कण जो अविभेदित हों तथा जिनकी चक्रण क्वांटन संख्या पूर्णांक हो। कण एक दूसरे से अविभेदित होते हैं। iवे क्वांटम स्तर के प्रत्येक कोश में कणों की संख्या 0, 1, 2, 3, … हो सकती है। निकाय में कुल कणों की संख्या सदैव नियत रहती है, अर्थात्‌  n = Σn i  = नियत विभिन्न समूहों में स्थित सभी कणों की ऊर्जा का योग अर्थात् निकाय की कुल ऊर्जा सदैव नियत रहती है, अर्थात्‌  E = Σn i ε i  = नियत हम n स्वतंत्र समरूप कणों पर विचार करते हैं। इन कणों को क्वांटम समूहों या स्तरों में इस प्रकार वितरित करना है कि ऊर्जा स्तर    ε 1,  ε 2,  ε 3, ... ε i  अपभ्रष्टता    g 1,  g 2,  g 3, ... g i  कणों की संख्या    n 1,  n 2,  n 3, ... n i  हम एक बक्से पर विचार करते हैं। इस बक्से में g i  भाग हैं, जिसमें कणों को वितरित करना है। इन भागों या उपकोश के चयन के कुल तरीकों की संख्या g i  होगी। इसके प...

Differential equations in Hindi | अवकल समीकरण | Mathematics | BSc

अवकल समीकरण (Differential equations) साधारण अवकल समीकरण तथा आंशिक अवकल समीकरण (Ordinary Differential Equation and Partial Differential Equation) लेखक: डॉ. विमल सारस्वत, डॉ. अनिल कुमार मेनारिया, डॉ. गजेन्द्रपाल सिंह राठौड़ ISBN : 978-81-7906-969-1 Price: Rs. 385.00 प्रकाशक: हिमांशु पब्लिकेशन्स, हिरण मगरी उदयपुर; हिमांशु पब्लिकेशन् प्रकाश हाउस, अंसारी रोड, नई दिल्ली E-mail :  info@sacademy.co.in Phone:  +91 9664392614 To buy this book click on the link Differential Equations by Saraswat This book includes the following topics  यथार्थ एवं विशिष्ट रूप वाली अवकल समीकरण (Exact Differential Equations and Equations of Special Forms) परिचय (Introduction) nवीं कोटि के यथार्थ रैखिक अवकल समीकरण (Exact linear differential equation of nth order) nवीं कोटि के रैखिक अवकल समीकरण की यथार्थता का प्रतिबन्ध (Condition of exactness of a linear differential equation of order n) समाकलन गुणांक अरैखिक अवकल समीकरण की यथार्थता (Exactness of ...

अपभ्रष्टता | Degeneracy in Hindi

 अपभ्रष्टता वे सभी ऊर्जा स्तर जिनके आइगन मान समान हों, परन्तु आइगन फलन भिन्न हों, अपभ्रष्ट ऊर्जा स्तर कहलाते हैं। ऊर्जा स्तरों का यह गुण अपभ्रष्टता कहलाता है। अपभ्रष्टता का मुख्य कारण ऊर्जा स्तरों के आइगन फलनों का भिन्न—भिन्न होना है। समान ऊर्जाओं वाले ऊर्जा स्तर के आइगन फलन के भिन्न—भिन्न होने का मुख्य कारण उनकी क्वांटम संख्याओं का भिन्न—भिन्न होना है। ये भिन्न—भिन्न क्वांटम संख्याएं समान ऊर्जाओं वाले अलग—अलग तरंग फलनों को दर्शाती हैं। समान ऊर्जा वाले भिन्न—भिन्न तरंग फलनों या आइगन फलनों की संख्या उसकी अपभ्रष्टता की कोटि कहलाती है।